राज ठाकरे जिस प्रकार कि आग उगल रहा है उसे देखकर ये लगता है कि अब समय आ गया है कि क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व समाप्त कर देना ही इस देश कि अखंडता के लिए हितकर है । पहले वह हिन्दू हितों की बात करता था और जब समाज के एक बडे तबके ने उसे भाव नही दिया तो वह मराठी अस्तित्व का कुकरहांव अलापने लगा । अगर राज में काबिलियत है तो वह मुम्बई से बाहर निकलकर किसी दूसरे प्रांत में खुद को साबित करे . नरेन्द्र मोदी को सभी छद्म सेकुलरों ने खूब गरियाया लेकिन गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे भारत में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है और राज ठाकरे अपने घर में ही जमीं तलाश रहा है वह भी जमीन खोदकर...............
अली शाह जिलानी और उसके जैसे तमाम अलगाववादी नेताओं ने बीस साल पहले यही खेल कश्मीर में शुरू किया था और धरती के स्वर्ग को जीता जगता जहन्नुम बना दिया। क्या राज भी वही करने का इरादा रखता है ?
शनिवार, 2 फरवरी 2008
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